हिंदी भाषा का विकाश, प्राकृत, पालि, संस्कृत, अपभ्रंश

हिंदी भाषा का विकाश में हम निम्न को पढ़ेंग

  1. भारतीय भाषाएँ, प्राकृत, पालि, संस्कृत, अपभ्रंश, हिंदी
  2. भाषा के प्रकार
  3. लिपि
  4. प्राचीन भारतीय भाषाओं का विभाजन
  5. प्रमुख भाषाएँ एवं उनके कवि
  6. हिंदी भाषा
  7. हिंदी व्याकरण की महत्वपूर्ण पुस्तके

 

भाषा के प्रकार

बोली- किसी छोटे स्थान की संपर्क के लिए प्रयोग ध्वनि या संकेतो को हम बोली कहते है

उपभाषा(विभाषा)- बोली के व्यापक रूप को ही विभाषा कहते है

भाषा- जब कोई बोली या उपभाषा व्याकरण के साथ मिलकर साहित्य रचना में उपयोग होने लगे

प्रयोजनमूलक भाषा- जब भाषा का उपयोग संपर्क के अलावा किसी कार्य में उपयोग हो, जैसे- व्यापार

लिपि

  • ध्वनियो को अंकित करने के लिए निश्चित किये गए चिन्हों या शब्दों की व्यवस्था को लिपि कहते है
  • लिपि शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के लिप शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है, लिपना या पोतना
  • भारत की सबसे पुरानी लिपि ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि है
  • भारत की सबसे प्रचलित लिपि देवनागरी लिपि है, संस्कृत, हिंदी, मराठी, नेपाली आदि सभी देवनागरी लिपि में है

देवनागरी लिपि की विशेषताए

  • यह जैसी बोली जाती है वैसी ही लिखी जाती है
  • इसमें कोई भी मूक शब्द नहीं होता
  • यह बाई से दी ओर लिखी जाती है

प्राचीन भारतीय भाषाओं का विभाजन

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प्राचीन भारतीय भाषाएँ

पालि भाषा- इसका अर्थ ‘पवित्र रचना’ है, गौतम बुद्ध के उपदेश इसी भाषा में है

प्राकृत भाषा– इसका अर्थ ‘स्वभाविक’ है, सम्राट अशोक के स्तंभों में इसी भाषा का उपयोग किया गया है इसके पांच प्रकार है-

1)शौरसेनी  2)पैशाची  3)महाराष्ट्री  4)मागधी  5)अर्धमागधी

अपभ्रंश भाषा– इसका अर्थ है ‘बिगड़ा हुआ’ इसका सर्वप्रथम प्रयोग पतंजलि की रचनाओ में मिलता है, इसके चार है

1)अर्द्धमागधी   2)शौरसेनी   3)मागधी   4) खस

प्रमुख भाषाएँ एवं उनके कवि

हिंदी भाषा

  • हिंदी शब्द की उत्पत्ति हिन्दू शब्द से हुई है, जो सिंधु शब्द का फारसी रूप है
  • अमीर खुसरो को पहला हिंदी कवि माना जाता है
  • उन्होंने ने हिंदी भाषा के लिए हिन्दवी या हिन्दुई शब्द का प्रयोग किया
  • अंग्रेजो ने हिंदी को हिन्दुस्तानी नाम दिया
  • लल्लूजी लाल ने हिंदी को खड़ीबोली कहा

हिंदी व्याकरण की महत्वपूर्ण पुस्तके

  1. हिन्दुस्तानी भाषा (1698) –  जॉन जोशुआ केट्लेर
  2. ए ग्रामर ऑफ़ हिन्दुस्तानी लैंग्वेज (1796) – डॉ. जॉन गिलक्रिस्ट
  3. हिंदी शब्दानुशासन (1959) – किशोरीदास वाजपेयी

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