SEBI static GK for competitive exams in Hindi

SEBI in Hindi

SEBI यानी Securities and exchange board of India एवं हिंदी में इसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड भी कहते है, यहां सेक्युरिटीस का अर्थ दो चीजों से है पहला शेयर एवं दूसरा बांड. यहां हम सेबी से सम्बंधित निम्नलिखित बिन्दुओ कर चर्चा करेंगे –

  • परिचय
  • शेयर क्या है
  • सिक्योरिटी बांड क्या है
  • शक्तियां और कार्य

परिचय (Introduction of SEBI)

SEBI का मतलब सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया है यह सिक्योरिटी से संबंधित भारत की नियामक संस्था है जिसका निर्माण 1988 में किया गया था लेकिन प्रायोगिक तौर पर इसको 1992 में सेबी एक्ट बनने के बाद शक्तियां मिली. इसको हिंदी में ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’ के नाम से जाना जाता है. इसका हेड क्वार्टर मुंबई में है एवं अन्य शाखाएं न्यू दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद , जयपुर, बेंगलुरु में है.

इसका नियंत्रण सेबी के चेयरमैन(अध्यक्ष) द्वारा किया जाता है जिसको भारत सरकार नियुक्त करती है उनका कार्यकाल 3 साल का होता है या अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक, इसमें चेयरमैन के अलावा वित्त मंत्रालय के सदस्य और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सदस्य  भी शामिल होते हैं. इसके पहले चेयरमैन डॉक्टर S.A. Dave थे जो 1988 से 1990 तक किस पद पर कायम रहे.

शेयर क्या है ?

शेयर का मतलब होता है साझा करना, कंपनी अपने मालिकाना हक की हिस्सेदारी छोटे-छोटे अंश में बांट देती है जिसे कोई भी खरीद कर कंपनी में हिस्सेदारी साझा कर सकता है. इन अंशो को ही शेयर कहते हैं. किसी भी कंपनी को अपना व्यापार बड़ा करने के लिए पूंजी या धन की आवश्यकता होती है परंतु यह आवश्यक नहीं है कि पर्याप्त पूंजी उस कंपनी के पास हो अतः कंपनी अपनी धन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए बाजार में अपने शेयर जारी करती है, कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार उस कंपनी के शेयर लेकर उतने ही हिस्से का मालिक बन जाता है इसे ही शेयर कहते हैं तथा खरीदने वाले को शेयरधारक कहते हैं. कंपनी को अपने शेयर बेचने की पहले किसी स्टॉक एक्सचेंज में अपनी कंपनी को लिस्ट करवाना पड़ता है जैसे मुंबई स्टॉक एक्सचेंज या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज उसके बाद ही वह अपने शेयर पब्लिक को बेच सकती है.

सिक्योरिटी बांड क्या है ?

धन की कमी को पूरा करने के लिए कोई भी संस्था बैंक या सरकार सिक्योरिटी बांड को जारी करती है इसे कोई भी व्यक्ति या संस्था खरीद सकती है इस बांड में एक निश्चित समय के बाद एक निश्चित राशि देने का वादा किया जाता है, इससे होने वाली कमाई पर सरकार किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगाती है. प्रायः सिक्योरिटी बांड मुद्रास्फीति के बढ़ने पर जारी किए जाते हैं.

SEBI की शक्तियां और कार्य

सेबी का मुख्य कार्य सिक्योरिटी और इक्विटी मार्केट की विश्वसनीयता को बनाए रखना है. इसका कार्य मुख्यता तीन पहलुओं पर निर्भर करता है –

  1. सिक्योरिटीज को जारी करने वाला
  2. निवेशक
  3. बाजार मध्यस्थता से संबंधित पहलू

यह अपने क्षेत्र में कानून बनाती है उसमें न्याय करती है और उसकी व्यवस्था भी करती है, इसमें किसी भी बात से संबंधित न्यायिक फैसलों के लिए हाईकोर्ट में 3 जज होते हैं एवं अंतिम न्याय सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जाता है. अन्य निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य किये जाते है –

  • सिक्योरिटी और शेयर से संबंधित फाइनेंसियल अकाउंट की जांच करना.
  • किसी भी कंपनी के शेयर को शेयर बाजार में लिस्ट करना और उससे संबंधित कार्य.
  • शेयर ब्रोकर को लाइसेंस देना शेयर बेचने के लिए.
  • निवेशकों के धन की सुरक्षा करना एवं उनको किसी भी धोखाधड़ी से बचाना.

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